सोरायसिस एवं विटिलिगो / ल्यूकोडर्मा, एक्जिमा इत्यादि चर्म रोगों के लिए आशा की किरण!

सोरायसिस एक त्वचा रोग है जो दुनिया की 2-3% आबादी (लगभग 12.5 करोड़) को प्रभावित करता है। भारत में, अस्पतालों के अध्ययन के आधार पर, लगभग 1% आबादी को प्रभावित करने का अनुमान है। यह ब्लॉग मैंने सोरायसिस के अपने अनुभव के आधार पर लिखा है, पर अब मुझे लगता है कि यह कुछ अन्य त्वचा रोगों जैसे विटिलिगो / ल्यूकोडर्मा, एक्जिमा आदि को भी मदद कर सकता है। यदि आप किसी भी हालत में सुझाए गए प्रोटोकॉल को अपनाते हैं तो कृपया टिप्पणी अनुभाग में परिणाम साझा भी करेंगे कि क्या फायदा हुआ? इस तरह, हम संभवतः दूसरों की भी मदद कर सकते हैं।

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[यह ब्लॉग अंग्रेजी में लिखे मूल आलेख का अनुवाद है जो इस लिंक पर उपलब्ध है http://www.ranjan.in/hope-for-psoriasis/ ]

सोरायसिस एक त्वचा रोग है जो दुनिया की 2-3% आबादी (लगभग 12.5 करोड़) को प्रभावित करता है। भारत में, अस्पतालों के अध्ययन के आधार पर, लगभग 1% आबादी को प्रभावित करने का अनुमान है। यह ब्लॉग मैंने सोरायसिस के अपने अनुभव के आधार पर लिखा है, पर अब मुझे लगता है कि यह कुछ अन्य त्वचा रोगों जैसे विटिलिगो / ल्यूकोडर्मा, एक्जिमा आदि को भी मदद कर सकता है। यदि आप किसी भी हालत में सुझाए गए प्रोटोकॉल को अपनाते हैं तो कृपया टिप्पणी अनुभाग में परिणाम साझा भी करेंगे कि क्या फायदा हुआ? इस तरह, हम संभवतः दूसरों की भी मदद कर सकते हैं।

मैंने लगभग 10-12 साल पहले अपनी कोहनी पर एक छोटा सा पैच देखा था। मेरे घर में एक पार्टी के दौरान, किसी ने मुझसे इसके बारे में पूछा कि मैंने खुद को कहीं खरोंच तो नहीं लगा दिया है? पर वहाँ मेरे एक डॉक्टर पड़ोसी भी मौजूद थे और उन्होंने बताया कि यह सोरायसिस है।तब मैं इस बीमारी और इसकी गंभीरता से पूरी तरह से अनजान था। मैंने अपने पड़ोसी से पूछा कि मैं इसे ठीक करने के लिए क्या कर सकता हूँ तो उन्होंने मुझे कुछ मलहम लगाने का सुझाव दिया।

धीरे-धीरे यह घुटने और पीठ तक फैलने लगा। मैंने इसके बारे में पढ़ना शुरू किया और अंत में एक होम्योपैथिक चिकित्सक के पास गया। उनके पास अपने कक्ष में विभिन्न रोगियों की कई तस्वीरें थीं जिनका उन्होंने इलाज किया था। मैं दवा लेने के लिए हर 15 दिन में उनसे मिलता था। वह मेरे प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें लेते थे और कहते थे कि वह सुधार देख रहे है।

अगस्त 2012 की शुरुआत में मुझे गॉलस्टोन(पित्त पथरी) से संबंधित दर्द का सामना करना पड़ा| लगभग दो साल का होम्योपैथिक उपचार रुक गया क्योंकि मैं पित्त पथरी के मुद्दे को सुलझाने में व्यस्त हो गया। मैंने लैप्रोस्कोपी के बिना सफलतापूर्वक पथरी को निकाल भी लिया । सर्जरी के बिना पित्ताशय की पथरी को निकालने के लिए एक विधि का पालन किया। (इस पर मेरा ब्लॉग देखे सकते हैं – http://www.ranjan.in/livergall-bladder-cleanse-process-based-on-andreas-moritz-book/)। लेकिन होमियोपैथी के इलाज के कारण मुझे कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं नजर आया।

अप्रैल 2013 में, मैं TIFAC का प्रमुख बनने के लिए दिल्ली चला गया और नई जिम्मेदारियों के साथ बहुत व्यस्त हो गया। सोरायसिस भी शरीर के अधिक हिस्सों में फ़ैल गया था। कभी कभी संभावित इलाज के लिए इंटरनेट पर खोज करता था और दिए सुझावों का पालन करने की कोशिश भी करता था (निश्चित रूप से मेरे व्यस्त कार्यक्रम ने मुझे अपनी समस्या का समाधान करने का समय नहीं दिया )। मुझे सोरायसिस के उपचार से संबंधित कुछ पुस्तकें भी मिलीं। पर इनमें मुझे दिए गए सुझावों का पालन करना बहुत कठिन लगा। मैंने तथाकथित “नाइटशेड” सब्जियां (जैसे टमाटर, आलू, बैंगन आदि) से बचने की कोशिश भी की। यह करना कठिन था क्योंकि यह हमारे खाने में बहुत ज्यादा उपयोग होते हैं। मैंने उनसे बचने की कोशिश करने के लिए लगभग दो महीने प्रयास किया लेकिन कोई बदलाव नहीं देखा।

सितंबर 2018 में एक वेबसाइट मिला https://freedomfrompsoriasis.com | सोरायसिस में नाटकीय सुधार का दावा करते हुए । ऐसी कई वेबसाइटें हैं, लेकिन इस वेबसाइट के बारे में मुझे कुछ अलग लगा! ये कोई भी चीज खरीदने के लिए नहीं कह रहा था (जैसे कि किताबें या कुछ अन्य सामान)। यह मुफ्त में प्रोटोकॉल डाउनलोड करने की अनुमति दे रहा था। किसी तरह मुझे लगा कि इसे आजमाना सार्थक हो सकता है? प्रोटोकॉल कुछ आहार परिवर्तन और कुछ विटामिन और खनिज की खुराक के नियमों को कहते है। सितम्बर 2018 के अंत में मैंने प्रोटोकॉल शुरू किया और जितना संभव हो सके इसे पालन करने की कोशिश की। खुशी की बात यह हुई कि मेरे जीवन में पहली बार मुझे ध्यान देने योग्य सुधार दिखाई देने लगा। ढाई महीने की ही अवधि में शरीर के प्रभावित हिस्से परिवर्तन दिखाई देने लगे। पूरे शरीर में इसी तरह के सुधार होने लगे।

करीबी परिवार के सदस्यों को छोड़कर मैंने कभी भी किसी से इस छालरोग के बारे में बात नहीं की थी । एक बार जब मैं चमत्कार को देखने लगा तो मुझे इसके बारे में बात करना महत्वपूर्ण लगा और आखिरकार इसके बारे में लिखने लगा ताकि लाखों अन्य लोग भी इससे लाभान्वित हो सकें। उसी समय, मैंने इस प्रोटोकॉल को वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए चिकित्सा समुदाय के साथ काम करना शुरू कर दिया ताकि एक दिन यह मानक चिकित्सा पद्धति का हिस्सा बन जाए।

मैं यहां मूल प्रोटोकॉल और विभिन्न सप्लीमेंट्स (भारतीय ग्राहक की दृष्टि से) के स्रोत भी दे रहा हूँ । जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, प्रोटोकॉल के दो भाग हैं: (1) आहार परिवर्तन (2) पूरक (सप्लीमेंट्स)। मैं उन दोनों का संक्षेप में विवरण दे रहा हूँ । पूर्ण प्रोटोकॉल और उपयोगकर्ता अनुभव ऊपर उल्लिखित वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।

आहार परिवर्तन

आहार परिवर्तन एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है डेयरी उत्पादों के किसी भी रूप जैसे दूध, दही इत्यादि को न लेना ! प्रोटोकॉल इस पर कई बार जोर देता है। “नाइटशेड” सब्जियां , जैसे कि टमाटर, आलू, बैंगन, मिर्च इत्यादि से भी परहेज करना। ग्लूटेन से बचना भी उचित है।

इनसे बचने की आवश्यकता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न होती है। लेकिन सिर्फ सुरक्षित होने के लिए, मैंने जितना संभव हो उतना बचने की कोशिश की। एक बार सोरायसिस में सुधार हो जाने के बाद, व्यक्ति एक-एक कर उन्हें जोड़ना शुरू कर सकता है। यह हमें बताएगा कि इनमें से कोई एक सोरायसिस को ट्रिगर कर रहा है ?

पूरक(Supplements)

विटामिन D3 (20-30,000 IU दैनिक, 2 भोजन के बीच विभाजित) + विटामिन K2 MK7 400 mcg दैनिक लेना। आमतौर पर ये सॉफ्ट जेल के रूप में होते हैं और उन्हें कुछ FAT के कुछ रूप के साथ लिया जाना चाहिए (जैसे: नारियल तेल, जैतून का तेल आदि)।

मुझे AMAZON पर एक संयुक्त उत्पाद मिला – EternalHealth Vitamin D3 with K2 as MK-7 – Vitamin D & K Complex – 5000 IU Vitamin D3 & 100 mcg Vitamin K2 (MK-7) – 120 Vegetable Capsules) – https://www.amazon.in/gp/product/B07BGS44VW/ref=ppx_yo_dt_b_asin_title_o03_s00?ie=UTF8&psc=1

मैग्नीशियम क्लोराइड flakes और गरम पानी के 50/50 घोल में अंडरआर्म्स पर, घुटनों के पीछे, खोपड़ी और पैरों के नीचे की तरफ स्प्रे या तेल की तरह लगायें या पूरे शरीर पर, जहाँ जहाँ यह प्रभावित हो। यदि यह बहुत अधिक जलता है, तो थोड़ा पानी से पतला करें।इसे लगाने और यदि शौच बहुत अधिक पतला होने लगे, तो आप प्रत्येक दिन इसका उपयोग करने की मात्रा कम करें। (ध्यान रखें – यह थोड़े समय के लिए बहुत लाल और बदतर दिखाई देगा – लेकिन इसे अपनाते रहें | यह बेहतर हो जाएगा।)

मैंने इसे दिन में दो बार लगाया । एक बार सुबह, जब मैं खोपड़ी सहित पूरे शरीर पर लगाया और 20 मिनट के बाद स्नान करके इसे धो दिया। दूसरी बार शाम को, जब मैं केवल शरीर के निचले हिस्से पर लगाया (शरीर के ऊपरी हिस्सों में लगाने से आपको सोने में परेशानी हो सकती है)। इससे आपको बहुत नींद भी आएगी और वास्तव में इसका उपयोग नींद की समस्या वाले लोगों द्वारा भी किया जा सकता है।

मैंने इसे Amazon से खरीदा – Akshar Chem Magnesium Chloride, 500 Gram – https://www.amazon.in/gp/product/B0192R7G08/ref=ppx_yo_dt_b_asin_titin_o06_s00?ie=UTF8&psc=1 1 कप पानी उबालकर उस में एक कप मैग्नीशियम क्लोराइड flakes घोल दें । इस “मैग्नीशियम तेल” को बचा कर रखें और ऊपर बताए अनुसार दो बार दैनिक उपयोग करें । कुछ हफ्तों के भीतर आपको परिणाम दिखाई पड़ने चाहियें । कृपया वेबसाइट से पूर्ण प्रोटोकॉल जरूर पढ़ें।

कुछ चीजें और भी हैं , जो सोरायसिस को प्रभावित करती हैं, वे हैं: ( (1) Leaky gut (2) Candida.। Betaine Hydrochloride लेना भी कुछ लोगों की मदद करता है ।

Dead Sea Salt स्नान

कई लोगों ने dead sea salt स्नान को बहुत उपयोगी पाया है। जब मैं दो सप्ताह के लिए नवंबर 2018 में कैलिफोर्निया में अपनी बेटी से मिलने गया था, तो बाथटब में गर्म पानी और 6 कप dead sea salt के साथ स्नान किया था। यह त्वचा को बेहतर बनाने लगता है।

भारत में मैंने “डेड सी सॉल्ट” की खरीद उचित दरों पर यहां से की है –https://www.lookfantastic.co.in/westlab-dead-sea-salt-5kg/11227744.html

भविष्य के विकास

कई आहार नियंत्रण आंत की स्थिति को सुधारते हैं । माइक्रोबायोटा के साथ आंत की स्थिति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पिछले कुछ वर्षों में माइक्रोबायोटा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण देखी गयी है। यह विभिन्न तरीकों से खानपान से जुड़ा हुआ है। हमारे आंत में निवास करते लगभग 46 खरब जीवाणुओं की भूमिका को समझने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी अच्छा योगदान दे रहा है । हमारे पारंपरिक ज्ञान ने भोजन की भूमिका पर जोर दिया है। हो सकता है कि अब हम इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझने लगें?

मैंने इस दिशा में वैज्ञानिक कार्य शुरू करने के लिए एक समूह भी बनाया है और सहयोग करने के लिए चिकित्सा और वैज्ञानिक समुदाय के साथ चर्चा कर रहा हूँ।

उपयोगकर्ताओं से अपील

यदि आप इस प्रोटोकॉल का पालन करते हैं, तो कृपया प्रभावित क्षेत्र की तस्वीरें लें और रिकॉर्ड में रखें। अधिक से अधिक जानकारी नोट करते रहें और मेरे साथ साझा भी करें। यह हमारी जानकारी को बढ़ाने में मदद करेगी, जो प्रोटोकॉल में सुधार के लिए उपयोगी हो सकती है। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए वेबसाइट Freedom From Psoriasis को जरूर देखें । यह उपयोगी है।

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Prabhat Ranjan

Author: Prabhat Ranjan

Prof. Prabhat Ranjan is Vice Chancellor, D Y Patil International University, Akurdi, Pune. He was heading India's Technology Think Tank, TIFAC(tifac.org.in) as its Executive Director since April 2013 to April 2018. Earlier he was Professor at Dhirubhai Ambani Institute for Information and Communication Technology, Gandhinagar (DA-IICT) since 2002. He was educated in Netarhat School(near Ranchi), IIT Kharagpur and Delhi University. He received his Ph D from University of California, Berkeley where he carried our research on “Nuclear Fusion” at Lawrence Berkeley Laboratory during 1983-86. He immediately returned to India after this and carried out research in Nuclear Fusion area at Saha Institute of Nuclear Physics, Calcutta and Institute for Plasma Research(IPR), Gandhinagar. He played a major role in India’s Nuclear Fusion program and was Project Leader of the largest operational Indian Fusion Reactor, ADITYA, at Institute for Plasma Research from 1996-2002. His current interests include applications of Wireless Sensor Network to Wildlife, Planetary Exploration (Chandrayaan mission), Nuclear Fusion, Healthcare, Agriculture etc. He has received National Science Talent Search Award, IBM Faculty Innovation Grant and HP Innovate 2009 award, NPEDP-Mphasis Universal Design Award 2012, Bihar Gaurav Samman 2012 etc.

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Ln Malakalapalli Venkateswara Rao
Ln Malakalapalli Venkateswara Rao
1 year ago

Very Nice advice Sir But How many Days we Should use,N Give Your Priscription thanq

Birendra Kumar
Birendra Kumar
1 year ago

अद्भुत और उपयोगी जानकारी । मैंने आप के अनुभव आधारित दो पुस्तकों में से एक ( Liver and Gall Bladder Flush ) मंगाकर अध्ययन किया ।वर्तमान में पूने में ही रहकर इस आधार पर दो चार लोगों को सलाह दिया किन्तु परिणाम की सूचना नहीं मिली है ।पटना जाकर ज्यादा लोगों पर इसकी सफलता का मूल्यांकन होगा।वैसे यह आप का‌ स्वानुभूत सफल प्रयोग‌ है तो निश्चय ही जनोपयोगी होगा क्योकि आप की खोजी प्रवृत्ति सफलता को अवश्य प्राप्त‌करती है ।